राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रतापगढ़ के द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन।
मान्धाता खंड स्थित एस.एस. एकेडमी, बलिकरनगंज में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रतापगढ़ विभाग के विभाग प्रचारक आदरणीय श्री ओम प्रकाश जी रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रतापगढ़ के द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
मान्धाता प्रतापगढ़, 13 सितंबर।
मान्धाता खंड स्थित एस.एस. एकेडमी, बलिकरनगंज में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रतापगढ़ विभाग के विभाग प्रचारक आदरणीय श्री ओम प्रकाश जी रहे।
कार्यक्रम का संचालन खंड कार्यवाह शारदा जी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित प्रमुख जनों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
मुख्य वक्ता श्री ओम प्रकाश जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में केवल अपनी उपलब्धियों का स्मरण नहीं कर रहा है, बल्कि समाज के सामने राष्ट्र निर्माण के अगले चरण का संकल्प भी प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य संगठित, संस्कारित एवं आत्मविश्वासी समाज के निर्माण के माध्यम से राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाना है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति में निहित है। भारत में अनेक भाषाएं, पंथ, परंपराएं और जीवन पद्धतियां हैं, लेकिन इन सभी को जोड़ने वाली एक सांस्कृतिक चेतना है। यही सांस्कृतिक एकात्मता भारत को राष्ट्र के रूप में सुदृढ़ बनाती है।
उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और महापुरुषों के जीवन-मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
श्री ओम प्रकाश जी ने कहा कि आज समाज के सामने अनेक चुनौतियां हैं। इनका समाधान केवल सरकार या किसी एक संस्था के प्रयास से संभव नहीं है। समाज का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे, तभी भारत सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगा।
उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ की चर्चा करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता को जीवन का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।
समाज में भेदभाव समाप्त कर प्रत्येक व्यक्ति को अपनत्व का अनुभव कराना, परिवार में संस्कार एवं संवाद को बढ़ाना, प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि परिवार भारतीय समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। परिवार मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा और समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र सशक्त बनेगा। बच्चों में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, मातृभूमि के प्रति गौरव और समाज के प्रति सेवा भाव का निर्माण परिवार से ही होता है।
उन्होंने उपस्थित प्रमुख नागरिकों का आह्वान करते हुए कहा कि समाज के जागरूक एवं प्रभावशाली लोग अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, व्यापार, कृषि, सामाजिक कार्य एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों को साथ लेकर चलें।
उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के पुनः स्मरण और संकल्प का अवसर है। हमें ऐसा भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है जो अपनी संस्कृति और मूल्यों पर गर्व करे, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान में अग्रणी हो, सामाजिक रूप से समरस हो तथा विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति या संगठन का कार्य नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का सामूहिक दायित्व है। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्य को राष्ट्रधर्म मानकर कार्य करेगा, तभी भारत विश्व के सामने एक समर्थ, संस्कारित एवं मार्गदर्शक राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
कार्यक्रम में माननीय खंड संघचालक अनंत जी, सह खंड संघचालक अरुणेश जी, खंड बौद्धिक प्रमुख अजय जी, संघ के अन्य पदाधिकारी, स्वयंसेवक एवं क्षेत्र के प्रमुख नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन खंड कार्यवाह शारदा जी ने किया।
प्रमुख जन गोष्ठी के माध्यम से राष्ट्र, समाज एवं संस्कृति के प्रति नागरिकों की भूमिका, सामाजिक समरसता तथा पंच परिवर्तन के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया गया।

